Rajan tiwari

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फ़ासला रह गया


212-212-212-212

बस यही बात मैं सोचता रह गया,
पास होकर भी क्यों फ़ासला रह गया//1

उसकी मंजिल कहीं दूसरी ओर थी,
और मैं रास्ता देखता रह गया//2

सबको आँखों से मय वो पिलाते रहे,
जाम खाली मगर बस मिरा रह गया//3

रात भी चाँदनी ओढ़कर सो गई,
और मैं सुब्ह तक जागता रह गया//4

चाहकर उसको घर कर न पाया कभी,
बस मकाँ जो बना था बना रह गया//5

झाँककर खुद में देखा तो पाया उसे,
मैं जिसे उम्र भर खोजता रह गया//6

लोग कुत्तों को बिस्किट खिलाते रहे,
आदमी रोटियाँ माँगता रह गया//7

बात कड़वी थी 'राजन' जो तूने कही,
आदमी तू बुरा का बुरा रह गया//8

     राजन तिवारी 'राजन'
           इंदौर (म.प्र.)
        7898897777

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2 Comments

Author Pawan saxena

10-Feb-2021 03:00 PM

bohut achcha likha apne tiwari ji

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Rajan tiwari

10-Feb-2021 05:46 PM

उत्साह वर्धन के लिए आपका हृदय से आभार।

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